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What is Black Hole?

https://www.helpajtak.in/2020/01/what-is-black-hole.html

 ब्लैक होल 

श्याम विवर यानी प्ले खोल यह प्रमाण का एक ऐसा दायित्व है जो अपने में बहुत सारे रहस्य को संजोए हुए हैं आइए आज उसके 11 रहस्य की पड़ताल करते हैं और ब्लैक होल के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं
ब्लैक होल के बारे में दुनिया के सामने सबसे पहले अपने विचार प्रकट करने वाले वैज्ञानिक थे प्रोफेसर जॉन मिशेल मिशेल कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक अध्यापक थे और उन्होंने ब्लैक होल के बारे में अपने विचार सन 1786 में रखे थे।

 उनके बाद 1796 में फ्रांस के एक वैज्ञानिक पियरे साइमन ने अपनी पुस्तक द सिस्टम ऑफ द वर्ल्ड में ब्लैक होल के बारे में विस्तार से जिक्र किया ब्लैक होल ब्रह्मांड का ऐसा पेड़ है जिसका गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि उसके पास रोशनी भी नहीं जा सकती और अंतरिक्ष में उसके आसपास या उसके गुरुत्वाकर्षण में आने वाली हर चीज ब्लैक होल निकल लेता है सिर्फ इतना ही नहीं ब्लैक होल के जितने नजदीक आते हैं उतना समय का भी प्रभाव कम हो जाता है और ब्लैक होल के गहरे के अंदर तो समय का कोई अस्तित्व ही नहीं है ।

तो चलिए जानते हैं इतना रोचक भिंड अखिल ब्रह्मांड में उत्पन्न कैसे होता है

इलेक्ट्रॉनिक अत्यंत घनत्व और द्रव्यमान वाला पिंड होता है ब्रह्मांड में किसी भी वस्तु को हम अगर क्रास करके बहुत छोटी कर दे तो उसके द्रव्यमान और घनत्व से उसका गुरुत्वाकर्षण बल कितना प्रबल हो जाएगा कि उसके बाहर रोशनी का भी जाना संभव नहीं होगा और वह चीज ब्लैक होल कह लाएगी
यदि हमारी पृथ्वी का घनत्व बहुत बढ़ जाए और संपूर्ण पृथ्वी को कौन प्रेस करके  1.5 सेंटीमीटर कर दिया जाए तो उसका गुरुत्वाकर्षण बढ जाएगा और वह ब्लैक होल हो जाएगी ।
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 पृथ्वी से 1300000 गुना बड़े हमर सूर्य को भी अगर क्रास करके एक छोटे से मटर के दाने के समान कर दिया जाए तो वह भी एक ब्लैक होल हो जाएगा ।लेकिन याद रहे कि ब्लैक हॉल में कभी मन की तुलना में कनक तो बहुत महत्वपूर्ण है हम जानते हैं कि पृथ्वी और सूर्य इस तरह से संकुचित नहीं हो सकते क्योंकि ना तो पृथ्वी का द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण बल इतना अधिक है और ना ही सूर्य का लेकिन हमारे सूर्य से करोड़ों गुना बड़ा कोई तारा हो जिसका द्रव्यमान और घनत्व अपार मात्रा में उसमें मौजूद हो तो वह अपनी इन विशेषताओं से ब्लैक होल बन सकता है।

अक्सर ब्लैक होल तारों के ही बनते हैं तो आइए ब्लैक होल के निर्माण को समझने से पहले हम तारों की रचना कैसे होती है यह समझते हैं

दरअसल तारों का जन्म ब्रम्हाण की गैलेक्सी में उपस्थित धूल और कड़ से  बने बादलों से होता है ब्रह्मांड में धूल और कड़ से बने इन बादलों को निहारिका याने ब्लॉक कहते हैं इन निहारिका में हाइड्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है और लगभग 25% तक एलियन होता है और बहुत कम मात्रा में कुछ और भारी तत्व भी होते हैं जब धूल कड़ से भरें इन बादल यानी की निहारी  में घनत्व की वृद्धि होती है उस समय यह बादल अपने गुरुत्व के कारण संकुचित होने लगता है और उसके अंदर का ताप इतना बढ़ जाता है कि हाइड्रोजन के नाभिक आपस में टकराने लगते हैं और वह हीलियम के नाभिक का निर्माण करते हैं और गति तथा संकुचन के कारण वे एकजुट होकर क्रास  यह लगभग क्रास के समान आकार में परिवर्तित हो जाता है और इस प्रकार 1 तारीख का निर्माण होता है
लेकिन इन प्रक्रिया में कई करोड़ों साल भी चालते ही हमारे सूर्य का निर्माण भी ऐसे ही हुआ था।
अब तक नाभिकीय संलयन से निकली प्रचंड उस्मा से ही तारों का गुरुत्वाकर्षण संतुलन में रहता है इसलिए जब तारों में मौजूद हाइड्रोजन खत्म हो जाती है तो वह तारा धीरे-धीरे ठंडा होने लगता है।

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अब अपने ही इंटर्न को समाप्त कर चुके चौरे द्रव्यमान से 1 पॉइंट 4 * द्रव्यमान वाले तारे जो अपने ही गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध स्वयं को नहीं संभाल पाते ऐसे तारों के अंदर एक विस्फोट होता है जिसे सुपरनोवा कहते हैं।

इस विस्फोट के बाद यदि उस तारे का कोई घनत्व वाला अवशेष बचता है तो अत्याधिक घनत्व युक्त न्यूट्रॉन स्टार बन जाता है तारों पर अपार गुरुत्वीय खिंचाव होने के कारण तारा संकुचित या क्रास से होने लगता है और अंत में तारा एक निश्चित क्रांतिक सीमा या क्रिटिकल लिमिट तक संकुचित हो जाता है और इस अपार असाधारण संकुचन के कारण उसका स्पेस और टाइम भी विकृत हो जाता है और अपने में ही स्पेस और टाइम का अस्तित्व मिट जाने के कारण वह अदृश्य हो जाता है और यही वह अदृश्य पिंड होते हैं जिसे हम ब्लैक होल कहते हैं।

 किसी ब्लैक होल का संपूर्ण द्रव्यमान एक छोटे से बिंदु में केंद्रित रहता है जिसे सेंट्रल सिंगुलेरिटी पॉइंट कहते हैं इस बिंदु के आसपास की गोलाकर सीमा या क्षितिज को इवेंट होराइजन कहा जाता है इस इवेंट होराइजन के बाहर प्रकाश या कोई भी वस्तु नहीं जा सकती पर जहां पर समय का भी अस्तित्व नहीं है।

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आइंस्टाइन की स्पेशल थिअरी आफ रिलेटिविटी के अनुसार इस ब्लैक होल की पिंड से दूर एक निश्चित सीमा पर खड़े किसी प्रेक्षक की घड़ी अत्यंत मंद गति में और धीमी हो जाए और वहां का समय बहुत ही धीमी गति से चलेगा याद रहे कि समय निरपेक्ष है समय का बहाव ब्रह्मांड की विभिन्न जगहों पर अलग-अलग गति में है मतलब के पृथ्वी पर जो समय चल रहा है ब्रह्मांड में कहीं दूर उससे तेज या उससे अधिक समय चल रहा होगा इसे टाइम रिलीजन कहते हैं माने या ना माने पर य बहुत ही किया की रोचक हकीकत है।

ब्लैक होल की क्षितिज में आकर उसके अंदर गिरने वाली कोई भी वस्तु के अनूप बिखर जाएगी और वह धीरे-धीरे अदृश्य हो जाएगी और ब्लैक होल के घनत्व में किसी अज्ञात स्थान पर चली जाएगी जिसके बारे में अब तक पहुंच एक विज्ञानिक कुछ भी नहीं जानते हैं ब्लैक होल के प्रकार ब्रह्मांड में कई प्रकार के ब्लैक होल होते हैं जो अपने विशिष्ट गुणों के कारण पहचाने जाते हैं ऐसा तारा जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से कुछ गुना अधिक होता है और गुरुत्वीय संकुचन के कारण वह अंततः ब्लैक होल बना है उसे स्टेलर मास ब्लैक होल कहा जाता है
ब्लैक होल कितने प्रकार के होते हैं।
1= सुपरमैसिव ब्लैक होल
ऐसे ब्लैक खोल जिसका निर्माण आकाशगंगा यानी गैलेक्सी के केंद्र में होता है और जिसका घनत्व अपार होता है जो बहुत ही विराट होते हैं उसे सुपरमैसिव ब्लैक होल कहा जाता है ऐसे ब्लैक होल्स का द्रव्यमान हमारी सूर्य से लाखों गुना ज्यादा होता है हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के मध्य में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से एक करोड़ गुना ज्यादा है!
2 = प्रीमोर्दियल ए स्मॉल ब्लैक होल्स
कुछ ऐसे भी ब्लैक होल होते हैं जिनका द्रव्यमान हमारे सूर्य से कम होता है और जिनका निर्माण गुरुत्वीय संकुचन के कारण नहीं परंतु अपने केंद्र पक्के पदार्थ प्रताप के संपीड़ित होने के कारण हुआ है उसे प्रीमोर्दियल ए स्मॉल ब्लैक होल्स भी कहा जाता है इन लघु ब्लैक होल के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि उनका निर्माण ब्रह्मांड की उत्पत्ति के साथ हुआ होगा भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग्स के अनुसार हमें से ब्लैकपर्ल का अध्ययन कर रहस्य की प्रारंभिक अवस्था के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं।
दोस्तों हम में से कईयों के मन में यह प्रश्न उठता होगा कि ब्लैक होल प्रकाश को भी सोख लेते हैं और जिसके कारण वह ब्रह्मांड में अदृश्य मालूम होते हैं तो आखिरकार वैज्ञानिक ब्लैक होल का पता कैसे लगाते हैं मिशेल के अनुसार ब्लैक होल्स अदृश्य होने के बावजूद भी अपने आसपास निकटतम स्थित आकाशीय पिंडों पर अपना गुरुत्वीय प्रभाव डालते हैं ऐसे भी बीच में तो अंधेरा होता है लेकिन उसके आसपास की चीजें उस अंधेरे की तरफ खींच रही दिखाई देती है कभी-कभी तो ब्रह्मांड में दो तारे या दो ग्रह एक दूसरे की परिक्रमा करते मालूम होते हैं जिसके बीच में एक बहुत बड़ा काला धब्बा होता है इस अवस्था में वहां पर ब्लैक होल होने की स्थिति मालूम होती है कभी-कभी तो ब्लैक होल किसी दृश्य तारामंडल या गैलेक्सी के पदार्थों को अपनी ओर खींचकर उसे निकलता हुआ दिखाई देता है इस अवस्था में ब्लैक होल की स्पष्ट रूप से पुष्टि हो जाती है

आइए हम

यहां पर ब्लैक होल के कुछ अन्य रोचक तथ्य को भी संक्षिप्त में जान लेते हैं ब्लैक होल वास्तव में कोई छेद नहीं होते हैं वह तो किसी मरे हुए तारे के अवशेष मात्र होते हैं करोड़ों अरबों साल गुजरने के बाद किसी तारे का अंत होता है और वह ब्लैक फल के रूप में जन्म लेता है यहां पर याद रहे कि सभी तारे ब्लैकपर्ल नहीं बनते कुछ तारों के अंत के बाद उनकी और अवस्था में भी गति होती है  ब्लैक होल अपने आसपास आने वाले किसी भी अवकाश से पिंड को नहीं छोड़ता वह ग्रह लघु ग्रह धूमकेतु किसी पिंड को या पूरी की पूरी गैलेक्सी को भी अपनी और खींच कर निकल सकता है यहां पर ध्यान रहे कि ब्लैक होल अपने गुरुत्वीय घेरे में आने वाली किसी वस्तु को ही खींचेगा उसकी गुरुत्व घेरे के बाहर की कोई वस्तु उसमें नहीं जाता।
ब्लैक होल के बारे में तो मिशन के समय से ही कहा और लिखा जा रहा था लेकिन वैज्ञानिक प्रत्यक्षीकरण के साथ दुनिया के सामने आने वाला सबसे पहला ब्लैक होल था सिग्नस X1 इस ब्लैक होल की प्रत्यक्ष पुष्टि सन 1972 में की गई साउथ यूरोपियन लेबोरेट्री के वैज्ञानिकों ने अब तक खोजा गया सबसे विशाल ब्लैक खोल दो निकाला है इस प्ले खोल ने अपनी मेजबान गैलेक्सी ADC 1277 का 14 फ़ीसदी द्रव्यमान अपने अंदर ले रखा है वैज्ञानिकों ने अब तक ब्लैक होल के बारे में बहुत सारी जानकारी प्राप्त की है और उसकी खोज के अनुसंधान में कई सारे प्रयोग हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे ।
आशा है आपको यह Post  पसंद आया होगा अगर आपके कोई प्रश्न हो या कोई सुझाव हो तो हमें जरूर कमेंट करके बताएं ?
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